बीकानेर। स्थानीय जनता प्याऊ मार्ग स्थित धरणीधर रंगमंच पर साकेत शिक्षण संस्थान एवं टीम धरणीधर के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को त्रि-पुस्तक समीक्षा एवं लोकार्पण समारोह गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। समारोह में साहित्य, शिक्षा एवं शोध जगत से जुड़े विद्वानों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों और गणमान्य नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
कार्यक्रम में शोधकर्ता एवं लेखक डॉ मुकेश हर्ष द्वारा रचित तीन पुस्तकों भारतीय संस्कृति समाज और पुष्करणा, बीकानेर की छतरियाँ : स्थापत्य एवं कलात्मक अध्ययन तथा चूरु जिले का स्थापत्य एवं कलात्मक अध्ययन का अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से विधिवत लोकार्पण किया गया। समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ।
स्वागत उद्बोधन में कार्यक्रम आयोजक आनंद जोशी ने कहा कि साहित्य और शोध समाज को नई दिशा प्रदान करते हैं तथा ऐसे कार्यों को निरंतर प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
सबसे पहले बीकानेर की छतरियाँ : स्थापत्य एवं कलात्मक अध्ययन पुस्तक की समीक्षा राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान के डा.नितिन गोयल ने प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि पुस्तक में राजपरिवारों के साथ-साथ गैर-शासकीय छतरियों का भी विस्तृत विवेचन किया गया है। पुस्तक में स्थापत्य कला के विविध आयामों पर प्रकाश डालते हुए मुगल, राजपूत, बंगाली और ब्रिटिश स्थापत्य प्रभावों का गंभीर अध्ययन किया गया है।
दूसरी पुस्तक भारतीय संस्कृति समाज और पुष्करणा की समीक्षा डॉ अमित कुमार व्यास ने करते हुए कहा कि बीकानेर के समाज और संस्कृति को समृद्ध बनाने में स्थानीय समुदायों का बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने अन्य जातीय और सामाजिक समूहों पर भी इसी प्रकार के शोध कार्यों की आवश्यकता बताई।
तीसरी पुस्तक चूरु जिले का स्थापत्य एवं कलात्मक अध्ययन की समीक्षा राजकीय महारानी सुदर्शना महाविद्यालय की सहायक आचार्य सुनीता विश्नोई ने की। उन्होंने कहा कि पुस्तक में मंदिरनुमा छतरियों, हवेलियों और चूरु जिले की स्थापत्य कला का अत्यंत सूक्ष्म और कलात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है, जो शोधार्थियों के लिए उपयोगी साबित होगा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानंद व्यास ने कहा कि इतिहास को निष्पक्ष दृष्टिकोण से पुनर्लेखन की आवश्यकता है। उन्होंने शोधार्थियों और शिक्षकों से नए दृष्टिकोण के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए हर संभव सरकारी सहयोग का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजकीय डूंगर महाविद्यालय के प्राचार्य राजेंद्र पुरोहित ने विज्ञान और इतिहास के अंतर्संबंधों पर आधारित शोध को समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने शोधार्थियों को हर प्रकार की शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराने की बात कही।
विशिष्ट अतिथि डॉ सुमित व्यास ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए इस प्रकार के शोध कार्य अत्यंत आवश्यक हैं। वहीं महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय की इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ मेघना शर्मा ने कहा कि पुस्तकों में समाज और स्थापत्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों को गंभीरता से उठाया गया है, जो वर्तमान समय की आवश्यकता है।
अति विशिष्ट अतिथि एवं अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष भंवर लाल भादाणी ने कहा कि क्षेत्रीय इतिहास और पुरातत्व पर आधारित शोध कार्यों को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। उन्होंने राजस्थान आर्कियोलॉजी एंड एपिग्राफी संस्था की ओर से ऐसे कार्यों के लिए निरंतर सहयोग का भरोसा दिलाया।
राजकीय डूंगर महाविद्यालय के इतिहास विभागाध्यक्ष चन्द्र शेखर कच्छावा ने इतिहास लेखन और पुनर्लेखन की आवश्यकता पर बल देते हुए बताया कि केंद्र सरकार भारतीय ज्ञान परंपरा और पांडुलिपि संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए पुस्तक लेखन पर आर्थिक सहायता भी उपलब्ध करा रही है।
समाजसेवी एवं रोटेरियन राजेश चूरा ने कहा कि इतिहास का अध्ययन प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक है, क्योंकि हर विषय का अपना इतिहास होता है।
राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के उपनिदेशक डॉ हरिशंकर आचार्य ने लेखक डॉ. मुकेश हर्ष को उनके महत्वपूर्ण शोध कार्यों के लिए बधाई दी।
लेखक डॉ मुकेश हर्ष ने कहा कि इन पुस्तकों का उद्देश्य क्षेत्रीय इतिहास, कला और संस्कृति को शोध के माध्यम से व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाना है। उन्होंने आयोजन में सहयोग देने वाले सभी विद्वानों, सहयोगियों और संस्थाओं का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का संचालन ज्योति प्रकाश रंगा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन श्याम सुन्दर किराडू द्वारा प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर डॉ महेंद्र पुरोहित, डॉ नरेन्द्र कल्ला, डॉ सीएस मोदी, सहित अनेक शिक्षाविद, साहित्यकार, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।