बीकानेर। नगर निगम बीकानेर की सियासत ने 24 घंटे के भीतर ऐसा करवट ली कि राजनीतिक पंडित भी फेल हो गए।महापौर चुनाव में कांग्रेस के खेमे में जश्न था, लेकिन सोमवार को उपमहापौर चुनाव के नतीजों ने पूरे राजनीतिक समीकरण को उलटकर रख दिया। जिस निगम में कांग्रेस अपने पास 50 वोट होने का दावा कर रही थी, वहीं उपमहापौर चुनाव में उसके प्रत्याशी के खाते में केवल 38 वोट ही पहुंचे। दूसरी ओर भाजपा ने चुपचाप ऐसा दांव खेला कि उसके प्रत्याशी पंकज गहलोत 40 वोट हासिल कर उपमहापौर बन गए।
परिणाम सामने आते ही निगम परिसर में माहौल बदल गया। कल तक जहां कांग्रेस समर्थकों के चेहरे खिले हुए थे, वहीं मंगलवार को भाजपा कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी, आतिशबाजी और विजय जुलूस निकालकर जीत का जश्न मनाया। भाजपा खेमे में यह जीत किसी राजनीतिक बोनस से कम नहीं मानी जा रही।सबसे बड़ी चर्चा उन वोटों को लेकर है जो महापौर चुनाव में कांग्रेस के साथ दिखाई दिए थे, लेकिन उपमहापौर चुनाव में रास्ता बदल गए। महापौर चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को 50 वोट मिले थे, जबकि उपमहापौर चुनाव में नसीमा बानो को मात्र 38 वोट मिले। भाजपा के पंकज गहलोत को 40 वोट मिले, एक वोट नोटा को गया और एक मत खारिज हो गया। इस गणित ने निगम की राजनीति में कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।आज हुए चुनाव के बाद क्रॉस वोटिंग सबसे चर्चित शब्द बन गया है। चर्चा इस बात की है कि आखिर कांग्रेस के भरोसेमंद माने जा रहे वोट किस ओर मुड़ गए। हालांकि कोई खुलकर कुछ कहने को तैयार नहीं है, लेकिन नतीजों ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि निगम की राजनीति में अंदरखाने बहुत कुछ ऐसा चल रहा है जो ऊपर से दिखाई नहीं देता।दिलचस्प बात यह है कि अब नगर निगम की सत्ता दो हिस्सों में बंट गई है। महापौर की कुर्सी कांग्रेस के पास है, जबकि उपमहापौर की कुर्सी भाजपा के खाते में चली गई है। ऐसे में निगम बोर्ड की बैठकों से लेकर विकास कार्यों तक, आने वाले दिनों में सियासी रस्साकशी तय माना जा रहा है।