बीकानेर। अक्षय तृतीया के अवसर पर सोमवार को शहर में पतंगबाजी का उत्साह चरम पर रहा। सुबह से ही लोग छतों पर पहुंच गए और दिनभर “गवरा दादी पून दे, टाबरियां रा चंदा उड़े…” जैसे पारंपरिक दोहे गूंजते रहे। तेज धूप और लू के बावजूद पतंगबाजों का जोश कम नहीं हुआ। दोपहर तक हवा धीमी रहने से पतंगें कम उड़ीं, लेकिन शाम होते-होते आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर गया।
आखातीज के चलते सड़कों और बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा, जबकि छतों पर उत्सव जैसा माहौल नजर आया। युवाओं ने डीजे और लाउड स्पीकर पर गीत बजाकर पतंगबाजी की। “वो काट्यो” की आवाजों के बीच पेंच लड़े, वहीं बच्चे कटी पतंगों को लूटने के लिए गलियों में दौड़ते नजर आए। महिलाओं ने भी उत्साह के साथ पतंग उड़ाई। देर शाम तक पतंगबाजी जारी रही और कई जगह आतिशबाजी भी की गई।
सुबह घरों में परंपरागत खीचड़ा और आमली का भोजन किया गया। गर्मी से राहत के लिए लोगों ने शिकंजी, शर्बत और अन्य शीतल पेयों का सहारा लिया। खीचड़े के बाद आइसक्रीम और चाट-पकौड़ों का भी आनंद लिया गया।
परकोटे क्षेत्र में चंदा उड़ाने की परंपरा भी निभाई गई। आकाशा में उड़े म्हारो चंदों… जैसे दोहों के साथ शहर की सुख-समृद्धि की कामना की गई। मान्यता है कि चंदा जितना ऊंचा आसमान में जाएगा, शहर उतनी ही उन्नति करेगा। यही कारण है कि पतंगबाज पूरे उत्साह के साथ चंदा उड़ाकर खुशहाली की दुआ करते नजर आए।