बीकानेर। सोशल मीडिया पर इन दिनों वायरल हो रहे कुछ वीडियो न केवल चिंताजनक हैं, बल्कि समाज और प्रशासन दोनों के लिए एक गंभीर चेतावनी भी हैं। बीकानेर शहर से लेकर खाजूवाला, छतरगढ़ और नोखा तक सामने आए वीडियो में युवा नशे की हालत में सड़कों पर झूमते, गिरते और अपनी सुध-बुध खोते दिखाई दे रहे हैं। इन दृश्यों ने एक बार फिर उस सवाल को चर्चा के केंद्र में ला दिया है कि आखिर युवा पीढ़ी को नशे की दलदल में धकेलने वाले कारण क्या हैं और इस पर प्रभावी रोक कैसे लगाई जाए।
वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे युवाओं की स्थिति किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को झकझोरने के लिए काफी है। कुछ युवक इस कदर नशे के प्रभाव में नजर आते हैं कि उनके लिए अपने पैरों पर खड़ा रहना तक मुश्किल हो रहा है। सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह की तस्वीरें सामने आना केवल व्यक्तिगत नुकसान की कहानी नहीं, बल्कि सामाजिक ताने-बाने पर पड़ रहे दुष्प्रभाव का भी संकेत है।
बीकानेर की पहचान हमेशा शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों के लिए रही है, लेकिन हाल के वर्षों में नशे के बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों से भी लगातार ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जो बताती हैं कि समस्या अब किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही। युवाओं का नशे की ओर बढ़ता रुझान परिवारों के लिए भी चिंता का कारण बनता जा रहा है। अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं, वहीं समाज में भी इस विषय को लेकर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है।हालांकि नशे के खिलाफ पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। रेंज आईजी ओमप्रकाश मेघवाल और एसपी मृदुल कच्छावा के निर्देशन में चलाए जा रहे ऑपरेशन नीलकंठ के तहत मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है। पुलिस की ओर से की जा रही कार्रवाई का असर भी दिखाई दे रहा है। बहरहाल शहर की सड़कों पर लड़खड़ाते ये कदम केवल कुछ युवाओं की कहानी नहीं हैं, बल्कि एक ऐसे सामाजिक संकट का संकेत हैं, जिसे नजरअंदाज करना समाज की आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से समझौता करने जैसा होगा।