बीकानेर। जिस बारिश का किसान बेसब्री से इंतजार करता है, वही बारिश बीकानेर की अनाज मंडी में उसके सपनों पर वज्रपात बनकर बरसी। खेतों में हरियाली लाने वाली बूंदें जब मंडी पहुंचीं, तो इस बारिश ने किसानों की महीनों की मेहनत को भीगों कर बर्बादी में बदल दिया।
खुले आसमान के नीचे रखी इसबगोल,जीरा और सरसों पानी में भीगता रहा, और किसान बेबस खड़े अपनी मेहनत को बिखरते देखते रहे। किसी ने तिरपाल ढकने की कोशिश की, कोई भीगे दानों को समेटता रहा, लेकिन बारिश ने किसी को संभलने का मौका नहीं दिया।
सिस्टम के आगे मजबूर किसानों की आंखों में अपनी फसल की बर्बादी का दर्द साफ दिखा, कृषि उपज मंडी में टिन शेड होने के बावजूद किसानों को जगह नहीं मिलना, इस दर्द को और गहरा करता है। किसानों का आरोप है कि इन शेड्स पर मंडी के व्यापारियों का कब्जा है, जिससे किसान मजबूर होकर अपना माल खुले में रखते हैं। और जैसे ही मौसम बिगड़ता है, सबसे बड़ा नुकसान उन्हें ही उठाना पड़ता है।
यह घटना सिर्फ मौसम की मार नहीं, बल्कि व्यवस्था की खामी भी उजागर करती है। जहां एक ओर सुरक्षित जगह पर रखा माल बच जाता है, वहीं किसान की उपज हर बार जोखिम में रहती है। कृषि उपज मंडी में भीगा अनाज सिर्फ फसल का नुकसान नहीं, बल्कि उस भरोसे का भी है जो किसान व्यवस्था पर करता है और जो हर बारिश के बाद थोड़ा और बह जाता है।