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सहमा बचपन: अभी भी डरा हुआ है नन्हा रामू, कुत्तों के हमलें के बाद एक साल तक चलेगा इलाज

सहमा बचपन: अभी भी डरा हुआ है नन्हा रामू, कुत्तों के हमलें के बाद एक साल तक चलेगा इलाज

बीकानेर।श्री डूंगरगढ़ के ऊपनी गांव में हुए भयावह हादसे के बाद चार साल का मासूम सिर्फ शारीरिक ही नहीं, मानसिक पीड़ा से भी गुजर रहा है। जो बच्चा कल तक स्कूल जाने को उत्साहित था, वह आज अस्पताल के बिस्तर पर डरा- सहमा सा बैठा है। परिजनों के अनुसार वह अचानक घबराकर उठ जाता है, तेज आवाज सुनकर सिमट जाता है और बार-बार डरकर रो पड़ता है।बीकानेर जिले के ऊपनी गांव स्थित स्वामी विवेकानंद मॉडल सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला रामू पुत्र रामप्रताप सिद्ध बुधवार को अपने बड़े भाई के साथ पहली बार स्कूल गया था। कुछ देर कक्षा में बैठने के बाद वह खेलते-खेलते बाहर ग्राउंड में चला गया। इसी दौरान स्कूल का मुख्य गेट खुला होने से आवारा कुत्तों का झुंड परिसर में घुस आया और मासूम पर टूट पड़ा।हिंसक कुत्तों ने बच्चे के सिर की लगभग पूरी चमड़ी नोच ली और एक कान काट खाया। कंधे, गले, मुंह, हाथ, पैर और पीठ पर गहरे जख्म हैं। उसकी चीख-पुकार सुनकर वहां से गुजर रहे एक युवक ने साहस दिखाते हुए उसे कुत्तों के चंगुल से छुड़ाया। परिजन बदहवास हालत में उसे तुरंत पीबीएम अस्पताल लेकर पहुंचे।ट्रोमा सेंटर के सीएमओ डॉ कपिल ने बताया कि बच्चे को गंभीर स्किन लॉस हुआ है। घाव को कई बार साफ करने के बाद प्लास्टिक सर्जरी के जरिए स्किन ग्राफ्टिंग की जाएगी। घाव भरने में लगभग तीन सप्ताह का समय लग सकता है, जबकि सिर की त्वचा पूरी तरह सामान्य होने में एक वर्ष से अधिक समय लग सकता है।अभी भी बच्चे के घावो में संक्रमण का खतरा बना हुआ है और एक से अधिक सर्जरी करनी पड़ सकती है।
*डर के साए में बचपन*
परिजनों का कहना है कि बच्चा अब पहले जैसा चंचल नहीं रहा। अस्पताल में भी वह मां का हाथ कसकर पकड़ लेता है और आसपास किसी अनजान हलचल पर घबरा जाता है। डॉक्टरों का मानना है कि शारीरिक इलाज के साथ-साथ उसे भावनात्मक सहारे और मानसिक देखभाल की भी जरूरत होगी, ताकि वह इस सदमे से बाहर आ सके।
*ग्रामीणों में आक्रोश*
घटना के बाद गांव में दहशत और गुस्सा है। ग्रामीणों ने स्कूल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए सवाल उठाया कि मुख्य गेट खुला क्यों था और बच्चों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं थे। घटना की सूचना प्रशासन को दे दी गई है और कार्रवाई की मांग उठ रही है।
एक मासूम की चीखों ने पूरे गांव को झकझोर दिया है। अब सबकी निगाहें उसके स्वास्थ्य पर टिकी हैं—उम्मीद है कि वह न सिर्फ शारीरिक रूप से, बल्कि मानसिक रूप से भी इस भयावह अनुभव से उबर पाएगा।

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