बीकानेर। प्रदेश में खेजड़ी संरक्षण को लेकर अब सरकार पूरी तरह सख्त नजर आ रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की गंभीरता के बाद राजस्व विभाग ने प्रदेशभर में खेजड़ी की अवैध कटाई रोकने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। 5 फरवरी 2026 को विधानसभा में की गई घोषणा के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई तेज कर दी गई है।
राजस्व विभाग की ओर से प्रदेश के सभी संभागीय आयुक्तों और जिला कलेक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि खेजड़ी कटाई के मामलों में तुरंत प्रभाव से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही खेजड़ी संरक्षण हेतु विशेष कानून लाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
*11 दिन बाद महापड़ाव को मिली राहत, देर रात हुई वार्ता*
बीकानेर में पिछले 11 दिनों से चल रहे खेजड़ी बचाओ महापड़ाव को लेकर अब राहत की खबर सामने आई है। बुधवार देर रात सरकार का प्रतिनिधिमंडल महापड़ाव स्थल पर वार्ता के लिए पहुंचा।सरकार की ओर से केके विश्नोई, जसवंत विश्नोई, पब्बाराम विश्नोई और बिहारीलाल विश्नोई महापड़ाव स्थल पर पहुंचे और संत समाज व संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों से चर्चा की।वार्ता के दौरान प्रमुख मांग रखी गई कि कानून बनने तक पूरे प्रदेश में खेजड़ी कटाई पर रोक लगाई जाए। सरकार के प्रतिनिधियों ने विचार-विमर्श के बाद इस मांग को स्वीकार कर लिया। इसके बाद शासन सचिव की ओर से सभी जिला कलेक्टरों को खेजड़ी कटाई पर सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए गए।
*संघर्ष समिति ने किया ऐलान, आंदोलन स्थगित*
प्रतिनिधिमंडल की सकारात्मक वार्ता के बाद महापड़ाव स्थल पर संघर्ष समिति के नेता रामगोपाल विश्नोई ने घोषणा करते हुए कहा कि सरकार ने पर्यावरण प्रेमियों की मांगों को मान लिया है। उन्होंने कहा कि अब खेजड़ी कटाई करने वालों पर तुरंत प्रभाव से सख्त कार्रवाई होगी।
वहीं संघर्ष समिति के परसराम खोखर ने आंदोलन में जुड़े सर्व समाज के लोगों का आभार जताते हुए कहा कि सरकार ने खेजड़ी संरक्षण को लेकर सख्त कानून बनाने का आश्वासन दिया है। कानून बनने तक जिला प्रशासन खेजड़ी कटाई रोकने के लिए कठोर कदम उठाएगा।सरकार के आदेश के बाद संत समाज और पर्यावरण प्रेमियों ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रशासन का आभार जताया है।
*कब क्या-क्या हुआ महापड़ाव घटनाक्रम*
2 फरवरी
पॉलिटेक्निक कॉलेज में विशाल जनसभा के साथ महापड़ाव शुरू। हजारों पर्यावरण प्रेमी देशभर से पहुंचे।
3 फरवरी
29 संतों सहित 363 पर्यावरण प्रेमी आमरण अनशन पर बैठे।
4 फरवरी
आमरण अनशन करने वालों की संख्या 537 पहुंची, महापड़ाव स्थल पर अस्थायी अस्पताल बनाया गया।
5 फरवरी
संसद और विधानसभा में गूंजी खेजड़ी संरक्षण की आवाज। मुख्यमंत्री का संदेश लेकर प्रतिनिधिमंडल पहुंचा, आमरण अनशन समाप्त हुआ।
6 फरवरी
प्रदेशभर में खेजड़ी कटाई पर रोक की मांग पर अड़े पर्यावरण प्रेमी, क्रमिक अनशन शुरू।
8 फरवरी
संतों का प्रतिनिधिमंडल जयपुर में मुख्यमंत्री से मिला।
9 फरवरी
महापड़ाव जारी रखने की घोषणा।
10 फरवरी
शहर में कलश यात्रा निकाली गई।
11 फरवरी
संतों ने मांग पूरी होने पर महापड़ाव स्थगित करने का शपथ पत्र दिया, मौन जुलूस निकाला।
12 फरवरी
सरकार के निर्देश जारी होने के बाद आंदोलन स्थगित करने की घोषणा।
खेजड़ी संरक्षण कानून की तैयारी, प्रशासन अलर्ट
राजस्व विभाग के निर्देशों के बाद अब प्रदेशभर में प्रशासन अलर्ट मोड पर है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि खेजड़ी कटाई रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही विशेष कानून लाकर खेजड़ी संरक्षण को स्थायी रूप से मजबूत किया जाएगा।