बीकानेर। संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल में लापरवाही की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आचार्य तुलसी रीजनल कैंसर रिसर्च सेंटर में भर्ती 75 वर्षीय भंवरी देवी को जरूरत के वक्त गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ा दिया गया और कुछ ही देर में उनकी हालत बिगड़ गई।डॉक्टरों ने महिला में खून की भारी कमी बताकर ब्लड बैंक से एक यूनिट ब्लड मंगवाया। तीमारदार द्वारा लाए गए सैंपल डिमांड फॉर्म पर साफ तौर पर ए पाज़िटिव लिखा था, लेकिन ब्लड बैंक स्टाफ ने बी पाज़िटिव ब्लड थमा दिया। हैरानी की बात यह रही कि वार्ड में मौजूद स्टाफ ने भी बिना क्रॉस-चेक किए ब्लड चढ़ा दिया।
ब्लड चढ़ने के कुछ ही समय बाद महिला की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। डॉक्टरों ने जांच की तो सामने आया कि मरीज को गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ाया गया है। आनन-फानन में इलाज शुरू किया गया, जिससे मरीज की जान बचाई जा सकी।मामले की जानकारी मिलते ही भाजयुमो शहर अध्यक्ष वेद व्यास अस्पताल पहुंचे। परिजनों से बातचीत के बाद उन्होंने अस्पताल अधीक्षक और मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को फोन कर नाराजगी जताई। व्यास ने इसे मरीज की जान से खिलवाड़ बताते हुए अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए।
सूचना के बाद मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र वर्मा और कैंसर विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र बेनीवाल मौके पर पहुंचे। डॉ. वर्मा ने मौके पर ही जांच कमेटी गठित करने और रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया।इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि महिला को कैंसर अस्पताल में भर्ती किया गया, जबकि उसकी कैंसर रिपोर्ट अब तक आई ही नहीं थी। प्रशासन का तर्क है कि प्रारंभिक लक्षणों के आधार पर भर्ती किया गया, लेकिन गलत ब्लड चढ़ाने की घटना ने पूरी व्यवस्था की पोल खोल दी है।जब संभाग के सबसे बड़े अस्पताल में ब्लड ग्रुप जैसी बुनियादी प्रक्रिया में चूक हो सकती है, तो आम मरीज कितना सुरक्षित है? जांच कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार है, लेकिन इस घटना ने सिस्टम की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है।