बीकानेर।रविवार को प्रसारित हुए मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर देश की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के प्रयासों को सराहा। इस बार उनके संबोधन में बीकानेर का नाम विशेष रूप से गूंजा, जब उन्होंने ज्ञान भारतम् मिशन के तहत चल रहे पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान का जिक्र करते हुए अभय जैन ग्रन्थालय को प्रेरणादायक उदाहरण बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की प्राचीन पांडुलिपियां केवल इतिहास नहीं, बल्कि हमारी ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर हैं। उनका संरक्षण और डिजिटलीकरण आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रहा है।
राजस्थान बना देश में अव्वल
ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत पांडुलिपि सर्वेक्षण में राजस्थान ने देशभर में पहला स्थान हासिल किया है। प्रदेश में अब तक 13 लाख से अधिक पांडुलिपियों का सर्वेक्षण किया जा चुका है, जिनमें से 12.50 लाख से अधिक को सफलतापूर्वक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया गया है। इस उपलब्धि में बीकानेर के अभय जैन ग्रन्थालय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है।इस अभियान की सफलता के पीछे ग्रन्थालय के निदेशक ऋषभ नाहटा के नेतृत्व में एक समर्पित टीम का योगदान रहा। इसमें विश्वगुरुदीप आश्रम शोध संस्थान जयपुर के महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानेश्वर पुरी महाराज, जयप्रकाश शर्मा, डॉ. सुरेन्द्र कुमार शर्मा, मोहित बिस्सा सहित लव कुमार देराश्री, गौरव आचार्य और लक्ष्मीकांत उपाध्याय जैसे कई विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी रही।ऋषभ नाहटा के अनुसार, इस ऐतिहासिक ग्रन्थालय की स्थापना उनके पूर्वज अगरचंद नाहटा ने भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा को संरक्षित रखने के उद्देश्य से की थी। वर्षों की साधना से संकलित यह पांडुलिपि संग्रह आज आधुनिक तकनीक के माध्यम से डिजिटल रूप में नई पीढ़ी तक पहुंच रहा है।पुरा विशेषज्ञों का मानना है कि बीकानेर का यह ग्रन्थालय अब देश के लिए एक मॉडल बन चुका है, जहां परंपरा और तकनीक का बेहतरीन समन्वय देखने को मिलता है।प्रधानमंत्री द्वारा मन की बात में उल्लेख के बाद राजस्थान और खासकर बीकानेर के लिए यह गौरव का क्षण बन गया है। यह उपलब्धि न केवल सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में बड़ी सफलता है, बल्कि भारत के बौद्धिक पुनर्जागरण की ओर भी एक मजबूत कदम मानी जा रही है।