बीकानेर।शहर ने एक बार फिर अपनी गंगा-जमुनी तहज़ीब की जीवंत तस्वीर पेश की, जब एक ही समय में दो अलग-अलग धर्मों के पर्वों ने मिलकर भाईचारे और एकता का अद्भुत संदेश दिया। एक ओर ईद-उल-फितर की रौनक थी, तो दूसरी ओर गणगौर की आस्था अपने पूरे रंग में नजर आई।बड़ी ईदगाह में सुबह से ही मुस्लिम समाज के लोग जुटने लगे थे। सफेद परिधानों में सजे हजारों लोगों ने खुदा की बारगाह में सिर झुकाकर नमाज़ अदा की। पूरे माह रोज़े रखने के बाद ईद की नमाज़ के दौरान अल्लाह का शुक्रिया अदा किया गया और देश में अमन, तरक्की और भाईचारे की दुआ मांगी गई। नमाज़ के बाद गले मिलकर एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद देने का सिलसिला देर तक चलता रहा।इसी दौरान बडी ईदगाह के पास में एक छत पर एक अलग ही आस्था का दृश्य नजर आया। रंग-बिरंगे परिधानों में सजी हिंदू कन्याएं गणगौर माता की पूजा में लीन थीं। पारंपरिक गीतों की मधुर ध्वनि के बीच वे पूरे विधि-विधान से पूजन कर रही थीं और सुख-समृद्धि व अच्छे भविष्य की कामना कर रही थीं।एक तरफ अज़ान की गूंज, तो दूसरी ओर लोकगीतों की स्वर लहरियां दोनों मिलकर ऐसा माहौल बना रही थीं, जिसमें विविधता भी थी और एकता भी। यह दृश्य अपने आप में इस बात का प्रतीक था कि अलग-अलग आस्थाएं होते हुए भी दिलों में एक-दूसरे के प्रति सम्मान और अपनापन कितना गहरा है।