बीकानेर। विश्व मातृ भाषा दिवस के अवसर पर राजस्थानी मोट्यार परिषद की ओर से शनिवार को कलेक्टर कार्यालय के आगे एक दिन का सांकेतिक धरना देकर राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग उठाई गई। धरने में बड़ी संख्या में समाज के प्रतिनिधि और भाषा प्रेमी शामिल हुए।
वक्ताओं ने कहा कि राजस्थानी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि प्रदेश की पहचान, संस्कृति और आन-बान-शान है। देश की करोड़ों जनता द्वारा बोली जाने वाली इस भाषा को आज तक संवैधानिक मान्यता नहीं मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका कहना था कि आजादी के बाद से विभिन्न सरकारों ने राजस्थानी के साथ सौतेला व्यवहार किया है, जबकि लगभग 16 करोड़ लोगों के लिए यह संवाद का प्रमुख माध्यम है।राजस्थानी मोट्यार परिषद के अध्यक्ष शिवदान सिंह ने कहा कि अब धैर्य की परीक्षा का समय समाप्त हो चुका है और हक की लड़ाई को निर्णायक मोड़ तक ले जाया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले समय में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
आंदोलन से जुड़े रमेश कुमार ने कहा कि अब तक गांधीवादी तरीकों से अपनी बात रखी गई, लेकिन मांगों को अनसुना किया गया। उन्होंने कहा कि अब नई पीढ़ी अपने अधिकार लेना जानती है और सरकारों को यह समझ लेना चाहिए कि राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए संघर्ष और तेज होगा।
धरने के माध्यम से राज्य और केंद्र सरकार से मांग की गई कि राजस्थानी भाषा को शीघ्र ही संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कर उसकी गरिमा और पहचान को संवैधानिक संरक्षण दिया जाए।