
बीकानेर। शहर में यातायात व्यवस्था और ट्रैफिक पुलिस की चौकसी पर बड़ा सवाल उठाने वाली घटना मंगलवार देर रात महारानी कॉलेज पुलिया पर सामने आई। मरीज को लेकर अस्पताल जा रही एंबुलेंस को ओवरलोड तूड़ी से भरे ट्रक ने लंबे समय तक रास्ता नहीं दिया। इससे मरीज की जान सांसत में आ गई और परिजनों की धड़कनें थम-सी गईं।
हालांकि नियमों के मुताबिक शहर की सीमा में रात के समय तक भारी वाहनों के प्रवेश पर कड़ा प्रतिबंध है, मगर यह ट्रक बेधड़क शहर के बीचों-बीच पहुंच गया। सवाल उठता है कि जब पुलिस हर रात नाकाबंदी और चौकसी का दावा करती है तो फिर ऐसे वाहन शहर में कैसे घुस जाते हैं? क्या यह लापरवाही है या मिलीभगत?
इस घटना ने साफ कर दिया कि सिस्टम कागज़ों में मजबूत और ज़मीनी हकीकत में पूरी तरह पस्त है। मरीज की जान पर बनी इस घटना ने ट्रैफिक व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। अगर एंबुलेंस समय पर अस्पताल नहीं पहुंचती तो एंबुलेंस से ले जाए जा रहे मरीज की मौत भी हो सकती थी।
शहर में बेखौफ होकर घूम रहे ओवरलोड वाहन आए दिन दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं। आए दिन हादसे होते हैं और जानें जाती हैं, मगर जिम्मेदारों पर कोई फर्क नहीं पड़ता। ट्रैफिक पुलिस सिर्फ मोटरसाइकिल सवारों के बिना हेलमेट के चालान करने में व्यस्त है। वहीं दूसरी ओर ओवरलोड और भारी वाहनों पर नकेल कसने की इच्छाशक्ति की कमी दिखाई देती है।