बीकानेर । शहर में रामनवमी का पर्व सिर्फ एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आता है। शहर के तेलीवाड़ा चौक स्थित रघुनाथ मंदिर में पिछले करीब 125 वर्षों से भगवान श्रीराम की जन्म कुंडली का वाचन किया जा रहा है, जो इस पर्व को खास बना देता है।
चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाने वाली रामनवमी देशभर में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाती है, लेकिन बीकानेर में इस दिन का महत्व इस अनूठी परंपरा के कारण और भी बढ़ जाता है। मंदिर में सुरक्षित हस्तलिखित कुंडली का विधिवत पूजन किया जाता है और फिर उसका पारंपरिक तरीके से वाचन किया जाता है।
इस परंपरा की सबसे विशेष बात यह है कि कुंडली वाचन की जिम्मेदारी पीढ़ी दर पीढ़ी एक ही परिवार निभाता आ रहा है। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और नियमों के साथ निभाई जा रही है, जो बीकानेर की सांस्कृतिक निरंतरता को दर्शाती है।
मंदिर परिसर में स्थित वीर हनुमान जी की प्रतिमा के समक्ष यह धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में एकत्र होते हैं और पूरे विधि-विधान के साथ इस अद्भुत परंपरा के साक्षी बनते हैं।कुंडली वाचन से पूर्व विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इसके बाद भक्तों में प्रसाद के रूप में पंचामृत और पंजेरी का वितरण किया जाता है। खास बात यह है कि दूध, दही, केसर और पंचमेवा से तैयार लगभग 9 क्विंटल पंचामृत श्रद्धालुओं में बांटा जाता है, जो इस आयोजन की भव्यता को दर्शाता है।आधुनिकता के इस दौर में भी इस तरह की परंपराएं समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य कर रही हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा बन रही हैं।